Poetry, Quill

बैठ गया हूँ फिर…

बैठ गया हूँ फिर अपनी छोटी सी यह डायरी लेकर,
कानों में आवाज़ तेरी,
चेहरे पर मुस्कुराहट है,
एक हाथ में कलम और दूजे में तेरा हाथ है.

ख़ैर पता तो था घंटे भर की बात है सारी
आखिर कानों में आवाज़ है अब भी तेरी
चेहरे पर भी मुस्कुराहट है
एक हाथ में कलम पर दूजे में अब
सिर्फ तेरा एहसास है.