Poetry, Quill

ज़िंदा तो हो ही ना तुम!

तो क्या हुआ जो दिल टूट गया,
ज़िंदा तो हो ही ना तुम!

तो क्या हुआ जो ख्वाहिशें नहीं हुई पूरी,
तो क्या हुआ जो छोड़ गया वो तुम्हे,
तो क्या हुआ जो इबादत सरीखा ईश्क़ अधूरा रह गया,
ज़िंदा तो हो ही ना तुम!

तो क्या हुआ जो अंदर सब खोखला सा रह गया,
ज़िंदा तो हो ही ना तुम!

तो क्या हुआ जो दिल हो गया पत्थर,
तो क्या हुआ जो आँखें बन गयी दरिया,
तो क्या हुआ जो लिपट गयी खामोशियाँ,
ज़िंदा तो हो ही ना तुम!

तो क्या हुआ जो दिल टूट गया,
ज़िंदा तो हो ही ना तुम!